पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik विद्यालय-कार्तिक कुमार

विद्यालय-कार्तिक कुमार


Kartik Kumar

विद्यालय ज्ञान का मंदिर है,

भारत का यह सुंदर घर है।

यहीं खिलते सपनों के फूल,

यहीं बनते बच्चे अनमोल।

कक्षा-कक्षा दीप जलाती,

शिक्षा नई दिशा दिखलाती।

गुरु का स्नेह अमृत बनकर,

जीवन पथ को करता उज्ज्वल।

किताबें देती नई उड़ान,

मेहनत बनती सच्ची पहचान।

खेल, योग और विज्ञान संग,

गूँज उठे विद्यालय का रंग।

बेटी-बेटा एक समान,

शिक्षा सबसे बड़ा सम्मान।

स्वच्छ रहे हर आँगन प्यारा,

हरा-भरा हो देश हमारा।

अनुशासन की हो पहचान,

संस्कारों का बढ़े मान।

हर विद्यालय का यह नारा—

“पढ़ेगा भारत, बढ़ेगा भारत” सारा।

चलो सभी मिल करें प्रयास,

शिक्षा से होगा देश विकास।

हर स्कूल बने प्रेरणा स्थल,

यही हमारा पावन संबल।

रचनाकार: कार्तिक कुमार

राष्ट्रीय योग प्रशिक्षक 

मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली 7004318121

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