Month: May 2021

बस कुछ दिनों की बात है-पंकज कुमार बस कुछ दिनों की बात है-पंकज कुमार 

बस कुछ दिनों की बात है पल पल वो जाता गया  हमने ख़ुशियाँ मनानी शुरू कर दी दिल को वो धड़काता गया  हमने ख़ुशियाँ मनानी शुरू कर दी। घर की दहलीज़ को जिसने  लक्ष्मण रेखा बना दिया था  टिपटीपवा के डर से ज़्यादा जिसने  डर से डरना सिखा दिया था। वर्ष २०२० भी बड़ी अजीब […][...]

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गुरु की महिमा-बबीता चौरसियागुरु की महिमा-बबीता चौरसिया

गुरु की महिमा बाल पुष्प संग मिलकर गुरू उपवन नया बसाते हैं घर-घर में दीप जलाकर गुरू अंधियारा दूर भगाते हैं। हर कठिन पगडंडी पर गुरु चलना सिखाते हैं नस नस में उर्जा भरकर स्फूर्त नव शक्ति जगाते हैं। गुरु ब्रह्म के रूप में भी गुरु विष्णु की साया हैं गुरु पर न कभी भारी […][...]

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कौन कहते कि बच्चे पढते नहीं-नूतन कुमारी कौन कहते कि बच्चे पढते नहीं-नूतन कुमारी 

कौन कहते कि बच्चे पढते नहीं बुद्धिजीवी होना कुछेक की मुद्दत होती है, अनुकरण करना बच्चों की फितरत होती है, शिद्दत से हम उन्हें समझाते नहीं, कौन कहते हैं बच्चे पढते नहीं ? बच्चे को रखें सोशल मीडिया से दूर, खुद को भी करें इसके लिए मजबूर, एकाग्रता की सीख हम दे पाते नहीं, कौन […][...]

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सुर्योदय-नीभा सिंहसुर्योदय-नीभा सिंह

सूर्योदय आज कल सुबह उठते ही कोई भागम भाग का तनाव नहीं, फूलों संग, घर संग, सभी स्थानों में एक सम्मोहन सा जगा है। ना जाने यह कैसा सूर्योदय हुआ है? न कोलाहल है, न प्रदूषण है, पहली बार स्वच्छ वायु एवं ऑक्सीजन का अनुभव हुआ है। ना जाने यह कैसा सूर्योदय हुआ है? न […][...]

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आओ बचाएं पानी-संगीता कुमारी सिंहआओ बचाएं पानी-संगीता कुमारी सिंह

आओ बचाएं पानी मैं हूंँ तुम्हारी बूढ़ी नानी, आओ सुनाऊं तुम्हें कहानी, मेरी कहानी में है पानी, पानी जीवन का आधार, इसके बिना सूना संसार। ठोस, द्रव और गैस रूप में, बर्फ, जल और भाप है पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से, मिजुलकर बनता है पानी, बना नहींं सकते पर, बचा तो सकते हैं हम पानी। […][...]

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पर्दा-धीरज कुमार डीजेपर्दा-धीरज कुमार डीजे

पर्दा एक पर्दा खिड़की दरवाजों पर लगता है अजनबी लोगों से खुद को छुपाने के लिए। एक पर्दा घूंघट का होता बड़े लोगों से अपने संस्कार बताने के लिए। एक पर्दा ही तो है जिसे लगाकर बहुत कुछ छुपा लेते हैं हम। आंखों पर रंगीन चश्मा लगाकर आंखों के भाव छुपा लेते हैं हम। वैसा […][...]

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परोपकार-मनु कुमारीपरोपकार-मनु कुमारी

परोपकार एक थी रानी, बड़ी है मार्मिक उसकी कहानी, रानी के पास सबकुछ था, धन-दौलत रूपये पैसे, बंगला गाड़ी, सोने चांदी, पद प्रतिष्ठा, ऐशोआराम, सुख के थे साधन तमाम, फिर भी उसके चेहरे पर, रहती घनी उदासी छाई। मानो पूर्ण चंद्र पर, हल्की सी बदरी घिर आई। रानी ने सोची, क्यों रहती हूँ मैं उदास? […][...]

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मेरी बगियाा-संध्या रायमेरी बगियाा-संध्या राय

मेरी बगिया मेरे छत की छोटी बगिया, फूल खिले हैं इनमें प्यारे। देख के इनके प्यारे मुखड़े, मन आनन्दित हो जाता है। ये पौधे है जीवनदायी, इनकी सांसो से है प्राण हमारे। ये है जीवनरक्षक अपने, सच्चे वाले दोस्त हमारे। फिर भी हम क्यों समझ न पाते, इनको ही हम हैं सताते। जिनसे मिलता प्राणवायु, […][...]

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बारहमासा-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’बारहमासा-कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’

बारहमासा बारह माह और छः ऋतुओं से वर्ष का होता है निर्माण। आओ हम अपने शब्दों में करते हैं इसका बखान। नव संवत्सर का प्रथम मास है आया चैत्र मास देखो जीवन में नवचेतना लाया। अब आया दूसरा महीना वैशाख बहुत है खास स्कूलों में छुट्टी हुई बच्चों में है उल्लास। जेठ की भरी दुपहरियों […][...]

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ईद का त्योहार-एम० एस० हुसैन “कैमूरी”ईद का त्योहार-एम० एस० हुसैन “कैमूरी”

ईद का त्योहार ईद का त्योहार है आया खुशियों की सौगात है लाया रहमत और बरकत भी खूब साथ था रमज़ान लेकर आया। चलो बाज़ार से लाएंँ हम चलकर चीनी और सेवईयांँ दूध हमें तो यही मिलेंगे ले लो मक्खन और मलाईयाँ। उत्कृष्ट किस्म के सेवईयों से सज गई है यह बाज़ार सुरमा और टोपी […][...]

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