Day: September 19, 2025

अब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदीअब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

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तू अब भी यूँ रुका क्यूँ है? गुलाब कांटों से यूँ लगा क्यूँ है ? जिंदगी तेरा ये फ़लसफ़ा क्यूँ[...]

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Ram Kishor Pathak

देश हमारा -राम किशोर पाठकदेश हमारा -राम किशोर पाठक

0 Comments 8:52 pm

देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल[...]

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Girindra Mohan Jha

पेड़- गिरीन्द्र मोहन झापेड़- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 8:19 pm

पेड़ बीज को अंकुरित होने में भी लगता है संघर्ष, पौधे धीरे-धीरे बढ़कर हो जाते हैं पेड़, यह पतझड़-वसंत-ग्रीष्म-वृष्टि-शीत, सबको[...]

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महामानव -जैनेंद्र प्रसादमहामानव -जैनेंद्र प्रसाद

0 Comments 6:53 pm

महामानव पाकर भी ऊँचा पद- मिलता नहीं है यश, कई ऐसे गुमनाम, होते हैं यहांँ इंसान। घर से निकल कर-[...]

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