माँ की लाल साड़ीअलमारी के कोने में अब भी टंगी है वो लाल साड़ी,जिसमें बसती है माँ की मुस्कान —[...]
Day: October 21, 2025
ढूंढता हूं अवनीश कुमारढूंढता हूं अवनीश कुमार
“ढूंढ़ता हूं” मैं माँ की सुनी माँग में उस दमकती सुंदर आभा — ‘सिंदूर’ की वह पावन आभा ढूंढ़ता हूं,[...]
ज्योति-पर्व दीपावली- गीतज्योति-पर्व दीपावली- गीत
ज्योति-पर्व दीपावली- गीत हर्षित आज सभी नर-नारी, सुंदर सुखद तराना है। अगणित दीप जलाकर भू का, सारा तिमिर मिटाना है।।[...]
कचरे की ढेर जैनेंद्र प्रसादकचरे की ढेर जैनेंद्र प्रसाद
कचरे की ढेर समसामयिक रचना सबको दे खुशहाली, चली गई ये दिवाली, बाजारों में जमा हुई, कचरे की ढेर है।[...]
भुला नहीं हूं -बैकुंठ बिहारीभुला नहीं हूं -बैकुंठ बिहारी
भूला नहीं हूं बाल्यावस्था की शरारत भूला नहीं हूं, माता-पिता की आंखों में प्रसन्नता के अश्रु भूला नहीं हूं, किशोरावस्था[...]
गोवर्धन- राम किशोर पाठकगोवर्धन- राम किशोर पाठक
गोवर्धन- पादाकुलक छंद आधारित गीत व्रज वनिता के वासी प्यारे। मोहन नख पर पर्वत धारे।। सुरपति जमकर जल बरसाए। व्रजवासी[...]
दिवाली है आईं – मनु कुमारीदिवाली है आईं – मनु कुमारी
दिवाली है आई दीप जलाओ दीप जलाओ दिवाली है आई घर आंगन में चहुंओर अब,खुशियाली है छाई। मैं तो लूंगी[...]
