खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने[...]
Day: December 9, 2025
चिंता है रहती -रामकिशोर पाठकचिंता है रहती -रामकिशोर पाठक
चिंता है रहती- महा-शशिवदना छंद गीत दुख की सब गाथा, औरों से कहती। धन दौलत की, चिंता है रहती।। राम[...]
राम राम गाइए रामकिशोर पाठकराम राम गाइए रामकिशोर पाठक
राम-राम गाइए- अनामिका छंद आप जो बता रहे। साथ में खता कहे।। रोष क्यों सदा गहे। दोष को यहाँ सहे।।[...]
पंछी -रामपाल प्रसाद सिंहपंछी -रामपाल प्रसाद सिंह
दो पंछी क्यों विवश हुए हैं,बाहर जाने को। अपने हुए पराए मतलब,है समझाने को।। जीवन का हर पल सुखमय जब,तूने[...]
