(हाइकू) १ कोपल मुस्काई- भीनी आम्र-मंजरी में नव-प्राण-स्पंदन। २ पीत-पुष्प खिले- नीरव आँगन के भीतर स्मृति-सरोवर जागा। ३ सरसों हँसी- शीत का अंतिम अश्रु धरा ने पोंछा। ४ मलयानिल बहा-…
Author: Anupama Priyadarshini
अरज है शारदा से
अरज है शारदा से हे श्वेतपुंज ! हे शारदा! सुन लो विनय हमारी, हम दीन-हीन है पातकी तू पाप पुंज हारी। अब खोल दो माँ कमल नयन वरदान दे दो…
नारी तू अबला नहीं
नारी तू अबला नहीं नारी नहीं तू अबला है तू ही तो सबला है। बिन तेरे सब सूना है, सबकुछ तूने गूना है। रही नहीं तू चाकरी,…
| माँ शारदे की महिमा – मुन्नी कुमारी |
स्व-रचित कविता माँ शारदे की महिमा सुंदर – सुंदर सपना सजाएँ, माँ शारदे की महिमा गाएँ। विद्या से जग को महकाएँ, शुद्ध विचार हृदय में आए। वीणा वादिनी, माँ शारदे,…
अभी तो मैं बच्ची हूँ
अभी तो मैं बच्ची हूँ पापा इतनी क्या है जल्दी, थोड़ा पढ़-लिख जाने दो। अभी तो नन्हीं कली हूं, फूल तो बन जाने दो। मैं तो हूं छोटी सी गुड़िया,…
| मत छीनों बचपन – बाल विवाह |
स्व-रचित – कविता मत छीनो बचपन – बाल विवाह 1. नन्हीं सी गुड़िया है, बागों की कलियाँ है। हुआ न बचपन पूरा है, यौवन अभी अधूरा है। 2. कांच कली…
| मैं शिक्षक हूँ |
स्व-रचित -कविता मैं शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ, हाँ मैं शिक्षक हूँ, राष्ट्र का निर्माता हूँ, ज्ञान का दाता हूँ, हां मैं शिक्षक हूँ। मैं मिट्टी हूँ, पर सोना गढ़ता…
जनवरी
जनवरी जब-जब जनवरी है आती, तब-तब ठंडक है लाती; प्राणी घर में दुबके रहते, ठंडक उनको है ठिठुराती। बच्चे बूढ़ों पर तो यह, काल जैसी ही मंडराती; युवा…
Primary Teacher
“अभी ना ब्याह रचाओ मां “ अभी ना ब्याह रचाओ मां…. मुझे पढ़ लिख जाने दो अपने पैरों पर खड़ी होकर, मुझे कुछ बन जाने दो। अभी ना ब्याह रचाओ…
क्या बदलाव लायेगा नया साल-विवेक कुमार
बीते को भुलाना, नए को अपनाना, जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना, अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना, खट्टी मीठी यादों का बीता सफर सुहाना, यादों के झरोखों से…