*गुरु-शिष्य महिमा*

गुरु-शिष्य महिमा   गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर, चंद्रगुप्त मिशाल बना; नंद वंश का नाश कर, वह मगध सम्राट बना।   भद्रबाहु से शिक्षा पाकर, प्रियदर्शी अशोक बना; विश्वभर में…

मेरे सपनों का गांव

कविता   मेरे सपनों का गाँव   सहज सुभग शाश्वत विहान हो। मधु खग-कलरव, दिव्य आख्यान हो। जन-जन में बसे प्रबुद्ध ज्ञान हो। हो प्राकट्य जब प्रथम किरण का, विकास…

कविता

।। तुम हो मेरी रागिनी सी ।। तुम्हारी बोली जैसे मीठी रागिनी सी, अंधेरी रातों में हो तुम मेरी चाँदनी सी।। मैं चकोर, तुम हो पूनम की रात, जैसे मैं…

*चलें स्कूल*

चलें स्कूल   हम हैं सृजन के फूल, चलें स्कूल। चलें स्कूल, चलें स्कूल।।   बच्चे हैं हम, सृजन के हार, हमसे ही आती, है बहार। मिल जाये जवाब, हमें…

गुरु-शिष्य महिमा

गुरु-शिष्य महिमा   गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर, चंद्रगुप्त मिशाल बना; नंद वंश का नाश कर, वह मगध सम्राट बना।   भद्रबाहु से शिक्षा पाकर, प्रियदर्शी अशोक बना; विश्वभर में…

। गणतंत्र दिवस कविता – मुन्नी कुमारी।

। गणतंत्र दिवस। छब्बीस जनवरी का दिन है सुहाना, गणतंत्र हुआ है देश अपना । संविधान का मान बनाए रखना, अधिकार अपना जताए रखना। यह केवल पर्व नहीं, इतिहास की…