जब थककर बैठ गए थे हम, और लगा — अब आगे क्या? तब किसी ने धीरे से आकर कहा — “चलो, अभी रास्ता है बचा।” एस० एल० डी० से जूझते…
Author: Anupama Priyadarshini
*चलें स्कूल*
चलें स्कूल हम हैं सृजन के फूल, चलें स्कूल। चलें स्कूल, चलें स्कूल।। बच्चे हैं हम, सृजन के हार, हमसे ही आती, है बहार। मिल जाये जवाब, हमें…
गुरु-शिष्य महिमा
गुरु-शिष्य महिमा गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर, चंद्रगुप्त मिशाल बना; नंद वंश का नाश कर, वह मगध सम्राट बना। भद्रबाहु से शिक्षा पाकर, प्रियदर्शी अशोक बना; विश्वभर में…
शिक्षा की रोशनी में बदला मुज़फ्फरपुर”
विवेक कुमार
गांधी: देह नहीं, एक विचार
यह केवल एक तारीख नहीं, यह आत्मा का मौन है। आज भारत सिर झुकाकर कहता है— बापू, आप अमर हैं, कौन है जो आपको मौन कर सके? न तलवार…
। गणतंत्र दिवस कविता – मुन्नी कुमारी।
। गणतंत्र दिवस। छब्बीस जनवरी का दिन है सुहाना, गणतंत्र हुआ है देश अपना । संविधान का मान बनाए रखना, अधिकार अपना जताए रखना। यह केवल पर्व नहीं, इतिहास की…
वसंत- आस्था दीपाली
(हाइकू) १ कोपल मुस्काई- भीनी आम्र-मंजरी में नव-प्राण-स्पंदन। २ पीत-पुष्प खिले- नीरव आँगन के भीतर स्मृति-सरोवर जागा। ३ सरसों हँसी- शीत का अंतिम अश्रु धरा ने पोंछा। ४ मलयानिल बहा-…
अरज है शारदा से
अरज है शारदा से हे श्वेतपुंज ! हे शारदा! सुन लो विनय हमारी, हम दीन-हीन है पातकी तू पाप पुंज हारी। अब खोल दो माँ कमल नयन वरदान दे दो…
नारी तू अबला नहीं
नारी तू अबला नहीं नारी नहीं तू अबला है तू ही तो सबला है। बिन तेरे सब सूना है, सबकुछ तूने गूना है। रही नहीं तू चाकरी,…
| माँ शारदे की महिमा – मुन्नी कुमारी |
स्व-रचित कविता माँ शारदे की महिमा सुंदर – सुंदर सपना सजाएँ, माँ शारदे की महिमा गाएँ। विद्या से जग को महकाएँ, शुद्ध विचार हृदय में आए। वीणा वादिनी, माँ शारदे,…