Author: Anupama Priyadarshini

Shilpi

दूर तक चलते हुए -शिल्पीदूर तक चलते हुए -शिल्पी

0 Comments 9:03 pm

घर की ओर लौटता आदमी होता नहीं कभी खाली हाथ हथेलियों की लकीरों संग लौटती हैं अक्सर उसके अभिलाषाएं, उम्मीद,[...]

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Meera Singh

धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “

0 Comments 7:59 pm

दादी माँ हमको समझाई क्यों करते वृक्षों का पूजन ? वृक्ष सभी होते हितकारी ये धरती के हैं आभूषण।। ये[...]

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Jainendra

मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 7:52 pm

सिर घुँघराले लट, तन पीतांबर पट, बहुत है नटखट, साँवरा साँवरिया। मंत्र मुक्त होता कवि, जाता बलिहारी रवि, मन को[...]

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Pushpa prasad

एक शिक्षक- पुष्पा प्रसादएक शिक्षक- पुष्पा प्रसाद

0 Comments 7:49 pm

एक शिक्षक अपनी पूरी जिंदगी बच्चो के साथ बिताते हैं। खुद सड़क की तरह एक जगह रखते है पर विद्यार्थी[...]

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Jainendra

कभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रविकभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:44 pm

रूप घनाक्षरी छंद तूफानों में नाव डोले, कभी खाए हिचकोले, धारा बीच माँझी चले, थाम कर पतवार। अवसर आने पर,[...]

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Nitu Rani

स्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानीस्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानी

0 Comments 5:36 pm

स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब, बैठके थोड़ा सोचिए जब समय मिलता है तब। इसी पृथ्वी[...]

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Girindra Mohan Jha

भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 5:33 pm

वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]

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Girindra Mohan Jha

सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:04 pm

सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]

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