आओ देखें यार,
हँसी के प्रकार –
शिशु के निश्चल हास्य में ,
ईश्वर का अहसास ।
कोमल मन की शुचिता का,
पल-पल हो आभास ।
बालपन की खिलखिलाहट ,
हर चिन्ता से मुक्त ।
खाने-खेलने की उमर ,
भोलेपन से युक्त ।
प्रेम का मूल स्वरूप है ,
होठों की मुसकान ।
मन के दर्पण में दिखाती ,
कैसा है इंसान ।
अहंकार में पड़ा मनुज ,
करता है अट्टहास ।
स्वयं पर उसे होता है ,
ज्यादा ही विश्वास ।
अंतर्मन में कुछ और है ,
बाहर से कुछ और ।
बनावटी हँसी हँस रहा ,
चालाकी का दौर ।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

