लेखनी-एस.के.पूनम

सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज है निष्कलंक, शब्दों की बुनाई ऐसी,पाठक को आई रास। डंठल…

बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी। कितने तन बलिदान,हुए हैं जग कल्याणी।। श्रेष्ठों में से एक,आज…

फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक

कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा करते सदा निठल्ला।। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।।०१।। फिर…

आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक 

आओ हे बनवारी- गीत हरने कष्ट हमारी। आओ हे बनवारी।। मेरा धर्म बचाना। करना नहीं बहाना।। आस रखी दुखियारी। आओ हे बनवारी।।०१।। जीवन बहुत कठिन है। लेकिन निर्मल मन है।।…

सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक 

सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न सखी! सर्दी।।०१।। कभी डरूँ तो छुप मैं जाऊँ। दिन-भर जमकर…

भोलेनाथ हमारे – राम किशोर पाठक

भोलेनाथ हमारे । तेरे भक्त पुकारे ।। आएँ हैं सब द्वारे । तू ही कष्ट उबारे।। आओ हे त्रिपुरारी। नैना नीर हमारी।। हे भोले अघहारी। शोभा सुंदर न्यारी।। नैनों को…