Author: Dr Snehlata Dwivedi

Girindra Mohan Jha

कौन रुका है – गिरींद्र मोहन झाकौन रुका है – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 4:15 pm

कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक पृथ्वी[...]

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Ram Kishore Pathak

प्रणत पाल हे राम आइए – राम किशोर पाठकप्रणत पाल हे राम आइए – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:13 pm

प्रणत पाल हे राम आइए- इंदिरा छंद वर्णिक १११-२१२-२१२-१२ प्रणत पाल हे राम आइए। विनित त्रस्त है ध्यान लाइए।। प्रखर[...]

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जागरूकता हम फैलाएंगे – मनु कुमारीजागरूकता हम फैलाएंगे – मनु कुमारी

0 Comments 4:06 pm

जागरूकता हम फैलायेंगे विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर, किशोरी के सम्मान और सुरक्षा दिवस पर, गाँव – गाँव हर गली[...]

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Girindra Mohan Jha

शिव स्तुति -गिरींद्र मोहन झाशिव स्तुति -गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 1:01 pm

शिव स्तुति – २ हे शिव शंभू रुद्र उमावर । नीलकंठ शिव हर महेश्वर ।। शंभूनाथ शिव शिव हे दिगम्बर[...]

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बाल विवाह -नीतू रानीबाल विवाह -नीतू रानी

0 Comments 12:53 pm

विषय -बाल विवाह। शीर्षक – दामाद आनलेअ बुढ़वा। माय गे शादी नै करिहेअ अभी पढ़ाई कराबिहेअ गे, जब बियाह के[...]

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Ram Kishore Pathak

प्रेरणा -राम किशोर पाठकप्रेरणा -राम किशोर पाठक

0 Comments 12:49 pm

प्रेरणा – मधुर ध्वनि छंद मुक्तक गहें प्रेरणा, उर संवेदना, सबसे प्यारी। हर्षित रहिए, सुख-दुख सहिए, बन‌ व्रत धारी।। उत्तम[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

गौ हत्या को रोकना -रामपाल प्रसाद सिंहगौ हत्या को रोकना -रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 12:45 pm

कुंडलिया। गौ-हत्या को रोकना, प्रश्न उठा फिर यक्ष। माता जिसको कह रहे,करना रोको भक्ष।। करना रोको भक्ष,दिलाकर माँ का दर्जा।[...]

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S K punam

नवतपा -एस के पूनमनवतपा -एस के पूनम

0 Comments 12:41 pm

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण घनाक्षरी विषय:-(नवतपा) आग बरसाते रवि, बढ़ रहे तापमान, तपती है धरातल,मुरझाया फूल है। चहुँओर वनराई, अनगिनत[...]

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Ram Kishore Pathak

नारी -रामकिशोर पाठकनारी -रामकिशोर पाठक

0 Comments 12:37 pm

नारी- मत्तमयूर छंद गीत वर्णिक २२२२, २११-२२१-१२२ मैं नारी हूंँ, प्रेम दया की अवतारी। गंगा जैसी, पावन हूँ कल्मषहारी।। मैं[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

धूप से तन मन जले हैं -रामपाल प्रसाद सिंहधूप से तन मन जले हैं -रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 12:32 pm

मनोरम छंद 2122 2122 धूप से तन-मन जले हैं। लाल-पीले फल ढले हैं।। सर्व सुंदर बाग प्यारा। राहगीरों का सहारा।।[...]

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