सर्दी आई । सर्दी आई, सर्दी आई ,लेकर कंबल और रजाई ।स्वेटर , कोट और शॉलों ने,सबको दी पूरी गरमाई । पर्वत – पर्वत बर्फ गिराती,ठंडी – ठंडी हवा चलाती…
Author: Swarakshi Swara
नशा छोड़िए..राम किशोर पाठक
नशा छोड़िए- गीतिका २१२२-२१२२-२१२२-२१२ त्यागिए खुद ही नशा को गर्त में मत खोइए। हो रहे बर्बाद क्यों आबाद भी तो होइए। देखिए उनको जरा करते नहीं हैं जो नशा। देखकर…
राम विवाह..रामकिशोर पाठक
राम विवाह – सरसी छंद गीत संग सभी भ्राता भी उनके, परिणय को तैयार।सिया वरण करने को आयें, सजे-धजे सुकुमार।। अगहन शुक्ल पंचमी आयी, होता राम विवाह।झूम रहे हैं सब…
बाल मनुहार..अमृता कुमारी
*बाल मनुहार* मां यह मुझे बता दे!आसमान क्यों है नीला कैसे उड़ लेती है चिड़ियां इस नील गगन में ऊपर झरनों में आता जल किधर से जो बहती है कल…
पुरुष होना आसान नहीं…मनु कुमारी
जिम्मेदारी का बोझ उठाए।अपने नींद और चैन गंवाए।वो मेहनत करें आराम नहीं ।पर मिलता उसे सम्मान नहीं ।सुनो!पुरुष होना आसान नहीं। मिलते हैं उसे कई उपनाम ।बुजदिल,नकारा,जोरू का गुलाम। डरपोक,नालायक…
शिक्षा का दीप…राम किशोर पाठक
शिक्षा का दीप जलाना है- गीत अब सबको राह दिखाना है। शिक्षा का दीप जलाना है।। चाहत सबकी नभ को छूना । शंकाओं का हल हो दूना।। अनपढ़ का रोग…
प्रकाश..राम किशोर पाठक
प्रकाश- अनंद छंद गीत (मात्रिक १२-१२-१२-१२, १२-१२-१२) सुमन यहाँ विछा रहें, पथिक चलो अभी।प्रदीप हम जला रहे, उदास क्यों सभी।। प्रयास लक्ष्य साधता, कदम बढ़ा जरा।सफल वही बना सदा, कभी…
घर में आकर.. राम किशोर पाठक
घर में आकर- वासुदेव छंद गीत अपनों से जब, नैन मिले।घर में आकर, चैन मिले।। दौड़ लगाकर, थक जाते।दुनिया की सुन, झल्लाते।।आकर आँगन, रैन मिले।घर में आकर, चैन मिले।।०१।। धन…
दुविधा…राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी दुविधा में हम पड़े,अपनी ही जिद अड़े,अधिकारी पास खड़े, होते परेशान हैं।साथी सारे कह रहे,लेन-देन कर कहे,चैन आप सब गहे, बने क्यों नादान हैं।रास मुझे आती नहीं,राज यह…
पहिले करु मतदान..मनु कुमारी
भैया ग्यारह नवंबर कय मतदान करू यौ ।पहिले करू मतदान तखन जलपान करू यौ। लोकतंत्र के ई अछि पाबनि महान।परिवार संग मिली करू मतदान ।भैया राष्ट्र सुरक्षा पर धिआन धरू…