बाल विवाह – नेहा कुमारी
खेलने के दिन है अभी, हुआ ना बचपन पूरा,
ब्याहने की जल्दी में पढ़ने की लालसा रह जाए ना अधूरा।
स्नेह और त्याग की मूर्ति को फलने दो,
समय बीतने पर मौका मिलेगा ना दोबारा।
कच्ची गागरिया को पूरा पकने दो,
ताकि टूटे ना जिंदगी का ख़्वाब अधूरा।
ब्याहने की होती है जो उम्र की सीमा,
क्यों हड़बड़ा कर तोड़ देते हो नैनो का तारा।
करने दो सपने साकार उनको भी,
सफल हो जाए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा।
जल्दी नहीं है बाल विवाह की,
आज से है संकल्प हमारा
नेहा कुमारी
रा. स. हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय, गणपतगंज
जिला – सुपौल
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