Category: छंद

S K punam

मनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनम

0 Comments 6:25 pm

शीर्षक: कभी रथ खींचिए मंदिर की ओर चलें, मिलेगी जीने की राह, जय बोलो जगन्नाथ, नमन तो कीजिए। हजारों हैं[...]

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Jainendra Prasad Ravi

विधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रविविधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:33 am

किसान “”””””””””””””””” फसल बोने के पूर्व, खेतों की जुताई हेतु, सुबह ही चल देते, हल बैल ले के संग। हरियाली[...]

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S K punam

अनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनमअनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनम

0 Comments 9:38 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी (अनंत शिल्पी यहाँ) विभुतियों का संसार,सितारे हैं मंच पर, पटल शोभित जहाँ,शब्दों का खेल वहाँ। उकेरे भावनाओं को,[...]

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S K punam

शीत-एस.के.पूनमशीत-एस.के.पूनम

0 Comments 6:13 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी “शीत” सघन है काली रात,रौशनी है थोड़ी-थोड़ी, बंद हुआ घर-द्वार,जाड़े का आलम है। सूर्य ढ़का तुहिन से,घूप थोड़ा[...]

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