Category: छंद

S K punam

अनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनमअनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनम

0 Comments 9:38 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी (अनंत शिल्पी यहाँ) विभुतियों का संसार,सितारे हैं मंच पर, पटल शोभित जहाँ,शब्दों का खेल वहाँ। उकेरे भावनाओं को,[...]

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S K punam

शीत-एस.के.पूनमशीत-एस.के.पूनम

0 Comments 6:13 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी “शीत” सघन है काली रात,रौशनी है थोड़ी-थोड़ी, बंद हुआ घर-द्वार,जाड़े का आलम है। सूर्य ढ़का तुहिन से,घूप थोड़ा[...]

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