बच्चों की आस हूं, रहता उनके पास हूं, सीखने सिखाने में उस्ताद हूं, हर पल देता उनको दाद हूं, देश[...]
Category: बाल कविता
मिट्टी का खिलौना- जयकृष्णा पासवानमिट्टी का खिलौना- जयकृष्णा पासवान
मैं मिट्टी हूं मगर एक आकार का प्यासा हूँ। कोमल हाथों से एक आकृति प्रदान कर दीजिए।। मैं इस उपकार[...]
सोन चिरैया गौरैया – सुरेश कुमार गौरवसोन चिरैया गौरैया – सुरेश कुमार गौरव
वर्तमान में पक्षी जगत की गौरैया अब विलुप्ति के कगार पर है। कहां चली गई कभी मेरे घर की मुंडेर[...]
पंछी – चांदनी समरपंछी – चांदनी समर
रोको ना मुझे टोको ना मुझे, पंछी को पर फैलाने दो है आज़ादी का स्वप्न मेरा, मुझे पंख खोल उड़[...]
मछली रानी- ब्यूटी कुमारीमछली रानी- ब्यूटी कुमारी
मछली रानी बड़ी सयानी मत कर तू मनमानी। कितने सुंदर शल्क हैं तेरे कोमल तन को ढकता। गिल्स से सांस[...]
आलू की असलियत कि इंसानी फितरत- नवाब मंजूरआलू की असलियत कि इंसानी फितरत- नवाब मंजूर
( भोजपुरी तड़का ) आलू जवन लाल हो जाला कमाल हो जाला एकदमे गुलाल हो जाला फूल के गुलाब हो[...]
बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बिस्किट मिठाई केक, नौनिहालों को भाते हैं, जहाँ हों खिलौने-टॉफी, आंखें उसी ओर हैं। कोई भी मौसम रहे, खुशियों की[...]
जंगल में विद्यालय- रणजीत कुशवाहाजंगल में विद्यालय- रणजीत कुशवाहा
शिक्षा बना बाजारवाद का आलय। जंगल में खुला ग्लोबल विद्यालय।। जब जंगल में विद्यालय खुला। प्रचार प्रसार खुब जमके हुआ।।[...]
वर्षा रानी- रणजीत कुशवाहावर्षा रानी- रणजीत कुशवाहा
खुब बरसों प्यारी वर्षा रानी। पग-पग कर दो पानी-पानी।। बादलों से मोरों को नचा ओ। मेंढक की टर्र – टर्र[...]
फूल बनूँ- अमरनाथ त्रिवेदीफूल बनूँ- अमरनाथ त्रिवेदी
फूल बनूँ ; काँटें न बनूँ , सबके मन का मीत बनूँ । रगड़ा नही किसी जन से हो ,[...]
