जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते[...]
Category: शैक्षणिक
वक्त पूछता है, गिरीन्द्र मोहन झावक्त पूछता है, गिरीन्द्र मोहन झा
वक्त पूछता है रात्रि में शयन से पूर्व वक्त पूछता है, आज तुमने क्या-क्या अर्थपूर्ण किया, सुबह होती है जब,[...]
बादल, आशीष अम्बरबादल, आशीष अम्बर
छोटी-छोटी बूँदें लाएँ, ये मतवाले बादल, श्वेत-स्लेटी, नीले-पीले, भूरे-काले बादल। कैसे-कैसे रूप बदलते, करते जादू-मंतर, हाथी जैसे कभी मचलते,[...]
मनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठकमनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठक
अंजन धारे सतत, कृष्ण कन्हाई नैन। देख लिया जो अगर, कैसे पाए चैन।। मूरत मनहर सुघर, मिले न कोई और।[...]
संशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठकसंशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठक
कृष्ण कन्हैया अगर, आते मिलने आज। होते विस्मित मगर, देख सभी के काज। माखन मिसरी सहज, उनको देता कौन। दुनिया[...]
शरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठकशरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठक
देखो आया शुभद, आज कई संयोग। रजनी लगती नवल, चकवा का हठयोग।। पूनम सुंदर धवल, लेकर आयी रूप। आज पूर्णिमा[...]
कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”
लक्ष्मी पूजा एवं कोजगरा की हार्दिक शुभकामनाएँ आप सबों को। विषय-गीत शीर्षक-कोजगरा। तर्ज-सावन का महीना पवन करे शोर। कोजगराक गीत[...]
बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पद्धरी छंद सम-मात्रिक छंद, 16 मात्राएँ आरंभ द्विकल से, पदांत Sl अनिवार्य। मां सिद्धिदायिनी दिव्य भाल। दिखते हैं सागर[...]
वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पेड़ लगा मां के नाम से, होंगे जग में नाम। उनके ही नेपथ्य में, पाना चिर विश्राम।। पाना चिर विश्राम,[...]
देश हमारा -राम किशोर पाठकदेश हमारा -राम किशोर पाठक
देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल[...]
