बड़े दिनों बाद वह, घर अपने वापस आया बेटी के लिए कुछ गुड्डे-गुड़िए, बेटे को किताबें लाया। बच्चों में कैसा[...]
Category: Aasha Ichchha
बस इतनी सी चाह- नीतू रानीबस इतनी सी चाह- नीतू रानी
बस इतनी सी चाह, हम हो जाते लापरवाह। बस इतनी सी चाह, जब रास्ते चलने लगते हैं तो भटक जाते[...]
पाप कर्म से डरें- एस.के.पूनमपाप कर्म से डरें- एस.के.पूनम
विद्या:-मनहरण घनाक्षरी सीताराम-सीताराम,नयनाभिराम राम, प्रातःकाल नाम लेके,सूर्य को नमन करें। संसार है आलोकित,सूरज के प्रकाश से, ऊर्जा का संचार कर,तन[...]
मेरी अभिलाषा- जयकृष्णा पासवानमेरी अभिलाषा- जयकृष्णा पासवान
मैं पंछी बन उन्मुक्त गगन में, दुनियां का भ्रमण करुं। काली-घटा की बलखाती बादल में भींग जाऊं।। यह मेरी अभिलाषा[...]
आहट – जयकृष्णा पासवानआहट – जयकृष्णा पासवान
वक्त अभी ठहरने का है, और समय बहुत परेशान हो- गया है। मन का अभी सुनिए मत, दिल अभी लहू-लुहान[...]
गंगा अब मैली नहीं- कंचन प्रभागंगा अब मैली नहीं- कंचन प्रभा
सुनाई देती है वही सुरीले पंछी की चहचहाहट फिर से है हवाओं में शीतल सी वही गीतों की गुनगुनाहट फिर[...]
भविष्य के प्रति आशा -अमरनाथ त्रिवेदीभविष्य के प्रति आशा -अमरनाथ त्रिवेदी
भविष्य बनने से पहले , इतिहास न बनो तुम । कर्त्तव्य के आलोक को , विस्मृत न करो तुम ।[...]
इंसान बनके दिखलाओ -अवनीश कुमारइंसान बनके दिखलाओ -अवनीश कुमार
हुए स्वार्थी और लोभी आज के मानव समझ नही ये बन बैठे है दानव काम ,क्रोध,मोह ,लोभ के पाश में[...]
आस की रौशनी – कंचन प्रभाआस की रौशनी – कंचन प्रभा
फूलों की खुशबू नभ प्रभात की आस भवरों की गूँजन संसार का मोह पाश है तिमिर लौ उस खण्डहर में[...]
बौनी उड़ान – कंचन प्रभाबौनी उड़ान – कंचन प्रभा
ये उड़ान अभी बौनी है मुझे ऊपर बहुत ही जाना है। ये थकान अभी थोड़ी है मुझे अन्त समय तक[...]
