द्विज एक रूप दिव्य जगत में। ज्ञान धर्म कर्म श्रेष्ठ सतत में।। तेज सूर्य का सहन है करता। विष्णु वक्ष पर पग रख सकता।। रक्षण करता है वेदों का। भक्षण…
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बेटी दिवस – नीतू रानी
बेटी दिवस पर बधाई हो बधाई,इस पर मैंने बँटबाई ढेरों सारी मिठाई,बेटी दिवस पर बधाई हो बधाई——-२। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओकम उम्र में न बेटी बियाहो,जहाँ तक पढ़ती है नहींरोको…
पुत्री दिवस- गिरिंद्र मोहन झा
आज अन्तरराष्ट्रीय पुत्री दिवस पर प्रस्तुत मेरी एक कविता:पुत्री-दिवसधन्य वह गेह है, जहँ खिलखिलाती बेटियाँ,धन्य वह गेह है, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ,धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती बहु-बेटियाँ,सारे देवों का वास…
भारत की बेटी -रिंकु कुमारी
मां हमें भारत की बेटी बनकर जीने दो रश्मों रिवाज की जंजीर तोड़कर आगे बढ़ने दो लाचार बनकर अब हमें जीना मंजूर नहीं, फौलाद बने जिगर बस इतना आशीर्वाद दो…
मैं पिता बन गया हूँ – बिंदु अग्रवाल
छोड़ दी हैं मैंने सारी अठखेलियाँ क्योंकि अब मैं पिता बन गया हूँ। अब मैं पिता को नखरे नहीं दिखाता, क्योंकि अब मैं पिता बन गया हूँ। छोड़ दी हैं…
वृद्धावस्था – गिरिंद्र मोहन झा
शैशव, बाल्य, किशोर, युवा,से होकर तुम बने हो वृद्ध,तुम्हारा असली,बड़ा गुण है,हर स्थिति में स्थिर औ’ सिद्ध,ज्ञान, विज्ञान, अनुभव में गम्भीर,हर परिस्थति में अटल, धीर और वीर,पैतृक सम्पत्ति के संरक्षण-संवर्द्धन…
माता की सवारी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद आश्विन पावन मास,नवरात्र होता खास,इस बार माता जी की, हाथी की सवारी है। श्रद्धा रख नर नारी-सामग्री खरीद रहे,भक्ति भाव रख करें, पूजा की तैयारी है। थाल…
मां आ जाओ- रुचिका
हर उलझन कैसे सुलझेयह राह हमें दिखलाओ।आओ माँ मेरे जीवन सेकष्ट सारे तुम हर ले जाओ। तुम्हारे आने से आत्मबल मिलता है,दुःख तकलीफ़ में भी अवलम्बन दिखता हैआओ मेरे जीवन…
ऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारी
ए ज़िन्दगी तेरे लिए क्या क्या करना रह गया बाक़ी,बस इतना बता दे ज़िन्दगी बहुत भटक लिया गुमनामी मेंए जिंदगी तेरे लिए जाना है कहाँ सपनों की ख़ातिर,बस वो राह…
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते जो तेरा।झलकी लेकर पास,अटककर लेते फेरा।। बिन जाने तव चाह,चाह…