अरिल्ल छंद चार चरण में 16 16 मात्रा पदांत 211/122वापस कर दो सुखी बनाकर।@@@@@@@@@@बादल छाए नभ के ऊपर।सोनू मोनू भाग[...]
Category: Bhawna
बस थोड़ी देर पहले…अवनीश कुमारबस थोड़ी देर पहले…अवनीश कुमार
बस थोड़ी ही देर पहले तो… बस थोड़ी ही देर पहले तो —एक रंगीन तितलीफूलों की क्यारी में नाच रही[...]
विवशता में सिसकते हैं -एस के पूनमविवशता में सिसकते हैं -एस के पूनम
विधा:-विधाता छंद।व्यंग।(विवशता में सिसकते हैं ) चुनावों के समय पर ही,प्रजा की याद आती है। करे वादें सभाओं में,प्रजा सुनकर[...]
एक पेड़ मां के नाम – अवधेश कुमारएक पेड़ मां के नाम – अवधेश कुमार
🌿 एक पेड़ माँ के नाम 🌿 माँ की ममता धरती पर आयी,हरियाली संग खुशियाँ लायी । जिसकी छाया में[...]
क्या तुमने कभी देखा है – अवनीश कुमारक्या तुमने कभी देखा है – अवनीश कुमार
(मानवता के आईने में झाँकती एक कविता) क्या तुमने कभी देखा है…बेबस, लाचार हर उस औरत कोजो ढो रही है[...]
समस्या – बैकुंठ बिहारीसमस्या – बैकुंठ बिहारी
समस्याजीवन का अभिन्न अंग है समस्या,सुख का साथी है समस्या,दुख का साथी है समस्या,भूत का साथी है समस्या,वर्तमान का साथी[...]
मैं चाहूं भईया का प्यार -मनु कुमारीमैं चाहूं भईया का प्यार -मनु कुमारी
मैं चाहूँ भईया का प्यार ! बहुत प्यारे हैं मेरे भईया, माँ पापा के दुलारे हैं मेरे भईया । ईश्वर[...]
एक सांस में जलता जीवन -अवधेश कुमारएक सांस में जलता जीवन -अवधेश कुमार
एक सांस में जलता जीवन (नशा मुक्ति पर कविता) नशा नहीं है किसी समाधान, ये लाता केवल दुख का जहान।[...]
स्वयं की खोज-अवधेश कुमारस्वयं की खोज-अवधेश कुमार
स्वयं की खोज : – भीड़ में गुम है कोई पहचान , हर चेहरा / मुखौटा जैसे एक समान। धन[...]
मां की लाल साड़ी – अवधेश कुमारमां की लाल साड़ी – अवधेश कुमार
माँ की लाल साड़ीअलमारी के कोने में अब भी टंगी है वो लाल साड़ी,जिसमें बसती है माँ की मुस्कान —[...]
