ठंडा – नीतू रानी

ठंडा का महीना  थर- थर कांँपै सब लोग, कोना केअ बनाएब खाना  कि खायत बच्चा मोर। मन नै करैयेअ हम बिछना सेअ निकली  ठंडा पैन सेअ हम बर्तन धोबी, ठंडा…

आँसू और खामोशी – नीतू रानी

आँसू और खामोशी सिर्फ महिलाओं में हीं होती, ये दोनों लेकर महिला  दिन- रात हैं रोती। आँसू और खामोशी  महिलाओं को सोने नहीं देती,  ये दोनों को सिर पर लेकर…

सावित्री बाई फुले-राम किशोर पाठक

तर्क कसौटी की थी दात्री। सावित्री शिक्षा की जात्री।। ज्योति जलाने जग में आई। नारी शिक्षा को फैलाई।। बनकर वह एक अधिष्ठात्री। सावित्री शिक्षा की जात्री।।०१।। पति से मिलकर कदम…

चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

शुभ भोर देख कर खग जागे।  डाली तरुवर पर से भागे।। विश्वास ध्यान अब है भू पर। खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।। जब भूख विवश करता तन को। करते सहमत अपने…

रजाई- राम किशोर पाठक 

लिपट-लिपट मैं जिसके रहती। शीत लहर को हँसकर सहती।। संग मुझे लगता सुखदाई। क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०१।। रंग विरंगा रूप सलोना। भूलूँ संग शीत का रोना।। संग में…

काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे जाग, चल देते काम को। कोई काम छोटा-बड़ा होता है…

बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी। कितने तन बलिदान,हुए हैं जग कल्याणी।। श्रेष्ठों में से एक,आज…

यूँ ही लम्हें बीत  जाएँगे – अमरनाथ त्रिवेदी

यूँ ही लम्हें बीत  जाएँगे , न हम रहेंगे न तुम रहोगे  फिर अपनी बात   कहाँ  और किसको कहोगे ? यह अंतहीन  सिलसिला  चलता ही जाएगा । क्या यह कभी  कहीं रुक भी…