मनहरण घनाक्षरी कवित्त छंद अचल सुहाग भाग, ईश्वर आशीष प्राप्त, पिया जी के साथ रहूँ,यही वर मांगती। भरे- पूरे रहें[...]
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बचपन की शरारतें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बचपन की शरारतें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जब कोई फल भाता, दूर से नज़र आता, छिप कर बागानों से, टिकोले को तोड़ता। गाँव की हीं महिलाएँ, कुएँ[...]
मेरे प्रश्नों के उत्तर- अवनीश कुमारमेरे प्रश्नों के उत्तर- अवनीश कुमार
अम्मा तुम तो कहती है चाँद पर एक बुढ़िया जो है चरखा चलाती पर मुझे अम्मा क्यों ऐसा लगता चाँद[...]
दिल्ली पर नज़र – जैनेन्द्र प्रसाद रविदिल्ली पर नज़र – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
चुनाव से हर बार तय होती जीत हार, किसी की आसान नहीं, सत्ता की डगर है। बयानों का ले के[...]
सबसे मधुर वाणी – मीरा सिंह “मीरा”सबसे मधुर वाणी – मीरा सिंह “मीरा”
विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक मौलिक, स्वरचित रचना प्रेषित है आओ बच्चों तुम्हें बताएं सबसे मधुर[...]
तपती-जलती वसुंधरा – मास्टर गौतम भारतीतपती-जलती वसुंधरा – मास्टर गौतम भारती
कई दिनों से उमस बड़ी है, तपती-जलती वसुंधरा । कहाँ खो गए नभ में बादल? कर दया आ बरस जरा,[...]
गर्मी आई गर्मी आई – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”गर्मी आई गर्मी आई – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”
देखो गर्मी आई गर्मी आई साथ में वो गर्म हवाएं लाई बाहर न निकलो बेमतलब घर में सुरक्षित रहो रे[...]
जब से आई गरमी – मीरा सिंह “मीरा”जब से आई गरमी – मीरा सिंह “मीरा”
सूरज बाबा ने हद कर दी सुबह सवेरे आते जल्दी। सूनी सूनी सड़कें गलियाँ दुबके बैठे बच्चे घर जी। आंख[...]
मौसम का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
रात दिन में भी ज्यादा- पड़ता है फर्क नहीं, ज़ालिम मौसम देखो, ढा रहा कहर है। जैसे -जैसे दिन ढले,[...]
मेरी कलम बहुत छोटी – नीतू रानीमेरी कलम बहुत छोटी – नीतू रानी
मेरी कलम बहुत छोटी लिखती है छोटी और मोटी, रूकने का कभी नाम नहीं लेती अंग्रेजी, हिंदी सबकुछ लिखती। कभी[...]
