Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Meera Singh

धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “

0 Comments 7:59 pm

दादी माँ हमको समझाई क्यों करते वृक्षों का पूजन ? वृक्ष सभी होते हितकारी ये धरती के हैं आभूषण।। ये[...]

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Nitu Rani

स्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानीस्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानी

0 Comments 5:36 pm

स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब, बैठके थोड़ा सोचिए जब समय मिलता है तब। इसी पृथ्वी[...]

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Girindra Mohan Jha

सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:04 pm

सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]

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Ratna Priya

हरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रियाहरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रिया

0 Comments 8:06 pm

सूरज के प्रचण्ड ताप से , अब नहीं कुम्हलाएँ हम । आओ करें श्रृंगार धरा का, हरियाली विकसाएँ हम ॥[...]

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S K punam

है बेबस धरती – एस.के.पूनमहै बेबस धरती – एस.के.पूनम

0 Comments 3:06 pm

मनहरण घनाक्षरी बहती है कलकल, सोचती है हरपल, सूखे नहीं नीर कभी,यही दुआ करती। तट पर आशियाना, साधु-संतों का ठिकाना,[...]

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S K punam

तुझे अपनाना है- एस.के.पूनमतुझे अपनाना है- एस.के.पूनम

0 Comments 3:05 pm

गगन में मेघ छाए, ठंडी-ठंडी बूंदें लाए, अंबु से सरिता भरी,हरि को पिलाना है। चल पड़े आप साथ, थाम रखें[...]

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Jainendra Prasad Ravi

अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:14 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद अखिल ब्रह्मांड बीच, कोई तो है सार्वभौम, जिसके इशारे बिना, पत्ता नहीं हिलता। धरती खनिज देती, सीप[...]

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Kumkum

मेघा रे- कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”मेघा रे- कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”

0 Comments 10:00 pm

आ जाओ रे मेघ, इतना मत न इतराओ। उजड़ रहा खलिहान,थोड़ा नीर बरसाओ।। हैं बहुत परेशान,तप रही धरा हमारी। कृपा[...]

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S K punam

मधुमास की घड़ी – एस.के.पूनममधुमास की घड़ी – एस.के.पूनम

0 Comments 7:37 pm

काली कच लहराई, विन्यास निखर आई, हाथों में मेंहदी लगे,प्रतीक्षा में थी खड़ी। सोलह श्रृंगार कर, वरमाला डाल कर, साक्षी[...]

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