Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Rinju Singh

नौ दिनों तक माँ के जयकारे – रिंजु सिंहनौ दिनों तक माँ के जयकारे – रिंजु सिंह

0 Comments 9:07 pm

नौ दिनों तक माँ के जयकारे – रिंजु सिंह मंदिर में सजते फूलों के गलियारे। माँ दुर्गा के चरणों में[...]

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Ashish Amber

माँ सुन लो पुकार – आशीष अम्बरमाँ सुन लो पुकार – आशीष अम्बर

0 Comments 9:01 pm

माँ सुन लो पुकार – आशीष अम्बर हम शरण तेरी आए, हम पर कृपा माँ कर दो, चरणों में बिठा[...]

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Nitu Rani

क्या यही है नवरात्रि का त्योहार – नीतू रानीक्या यही है नवरात्रि का त्योहार – नीतू रानी

0 Comments 11:35 pm

क्या यही है नवरात्रि का त्योहार – नीतू रानी क्या यही है नवरात्रि का त्योहार जिस त्योहार में माँ दुर्गे[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:30 pm

स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जो मैं कभी था ही नहीं… कभी क्षमा नहीं करूँगा मैं उन चेहरों[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

 वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:27 pm

वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर पदों के सार्थक मेल से, ‘वाक्य’ जनम लेता है, भावों और विचारों को, जो[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

सागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरसागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 3:29 pm

सागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अथाह मन का मीत यहाँ पर, यह जग सारा खारा है, सीने में[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

नाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरनाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 3:26 pm

नाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर संज्ञा (Noun) परिभाषा काव्य: जो बतलाए नाम को, वस्तु, जीव या स्थान।[...]

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Bebi Archana

मातृशक्ति – बेबी अर्चनामातृशक्ति – बेबी अर्चना

0 Comments 3:22 pm

मातृशक्ति – बेबी अर्चना हे मातृशक्ति अब जाग भी जाओ, कर निज-अस्तित्व की तू पहचान। बन सबला कर निज पथ-[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजानहरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान

0 Comments 3:18 pm

हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान सिद्धिदात्री आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी। शिव ने किया मनुहार तुझसे,[...]

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