मैं ईर्ष्या हूँ  –  मोहम्मद आसिफ इकबाल

मैं ईर्ष्या हूँ, मैं ऐसा ही हूँ। मनुष्य के मन में वास करता हूँ, संबंधों का सत्यानाश करता हूँ। हाँ मैं दोस्तों को भी नहीं छोड़ता, छोड़ता नहीं मैं दुश्मनों…

पगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

पगडंडी पर भागे ऐसे, बालक सुलभ सलोने हैं। नन्हीं-नन्हे साथ-साथ हैं, अनुभव नए पिरोने हैं। पगडंडी भी स्वागत करने, हरियाली के बीच खड़ी खड़ी फसल ललकार रही है, शक्ति और…

संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक

संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक नीति नियम का ग्रंथ यही है, जिसके सन्मुख समरस रहते। देश चलाते हैं हम जिससे, संविधान उसको कहते।। आजादी जब हमने पायी, हमको…

जिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठक

  १२२-१२२-१२२-१२२ उदासी छुपाकर जिए जा रहा हूँ। तभी तो लबों को सिए जा रहा हूँ।। निगाहें जिन्हें ढूँढती है हमेशा उन्हें बेनजर अब किए जा रहा हूँ।। उधारी चुकाना…

शिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठक

शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि? साजन! न सखी! शिक्षक।।०१ भूली बिसरी याद दिलाए। रोज नया…

राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राम किशोर पाठक 

राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राष्ट्र हेतु हम, मिट जाएँ। राष्ट्र-भक्त हम, कहलाएँ।। आओ मिलकर, पले यहाँ। कदम मिलाकर, चले जहाँ।। गीत संग हम, यह गाएँ। राष्ट्र-भक्त हम,…

तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान

तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने लगते शुभ भाव यहाॅं। भरने लगते मन घाव यहाॅं।। सजने…