झूमो गाओ, मिल-जुल सभी, प्रीत पाते सभी हैं। आओ प्यारे, जय-जय करें, गीत गाते सभी हैं।। आजादी है, समरस रहें, देश का तंत्र न्यारा। रंगों में है, घुल मिल…
Category: Prem
Love has no definition, and it is a feeling that comes within the heart. The meaning of love can be different for different people, different age groups, and different relationships, but the surface is the same for everyone. Love comes from knowledge, and for this, one needs to understand oneself.
मधुमास का श्रृंगार-मनु कुमारी
मधुमास ने जब धीरे से आँचल फैलाया, वसंत ने धरती को दुल्हन-सा सजाया। सौंदर्य झुका पत्तों की हरित पलकों में, लावण्य चमक उठा ,ओस की झिलमिल छलकों में। डाल-डाल पर…
घूँघट-मनु कुमारी
घूंघट में छुपा चाँद-सा मुख, नयनों में सपनों का बसेरा। लाज की कोमल चादर ओढ़े, मुस्कान बनी मन का सवेरा। धीमे-धीमे पग धरती पर, चूड़ियों ने गीत सुनाया है। पिया…
आह में देखो-राम किशोर पाठक
लोग हैं खास आह में देखो। कौन है आज डाह में देखो।। कह रहे हैं भला तुम्हें जो भी। दे अगर साथ राह में देखो।। फासले यहाँ दिलों में है।…
मेरी बेटी – सुमन सौरभ
मेरी बेटी तुम केवल ऊंची उड़ान ना भरो ऐसा भी करो कि एक कदम तुम्हारा धरती पर भी धरो…..। मेरी बेटी यहां केवल उजाला ही नहीं, तुम इस लगातार स्याह…
जड़मति-राम किशोर पाठक
समझ न पाता, मन घबराता। जड़मति हूॅं मैं, कुछ कर माता।। अगर कृपा माँ, कर कुछ दोगी। हर दुविधा को, अब हर लोगी।। शरण तुम्हारी, सब सुख दाता। जड़मति हूॅं…
छंद रचना को गहूँ-राम किशोर पाठक
विघ्न हर्ता देव हो तुम, कष्ट अपना मैं कहूँ। आज तुमसे आस मुझको, छंद रचना को गहूँ।। शब्द लाऊँ मैं कहाँ से, शिल्प कैसे मैं रचूँ। सत्य का बस हो…
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी मुरली बजा सकूँगा। मुरली तो मुझको दिलवाओ।। साँपों का फन…
वंदे मातरम् – गीत – राम किशोर पाठक
वंदे मातरम् – गीत भारत वासी दिल के अच्छे, चाहत सदा स्वच्छंद है। वंदे मातरम् गीत सुंदर, गाना सबको पसंद है।। वंदे मातरम्। वंदे मातरम्। बंकिम चन्द्र चटर्जी इसकी, रचना…
गृह लक्ष्मी पत्नी – राम किशोर पाठक
गृह लक्ष्मी पत्नी – कुंडलिया लक्ष्मी है पत्नी सदा, सुखकारी लो जान।जिसको मैंने वर लिया, रखती सबका ध्यान।।रखती सबका ध्यान, वही लक्ष्मी है घर की।मेरा यह वरदान, नहीं पाऊँ अब…