अनुपम है माँ की ममता-राम किशोर पाठक

अनुपम है माँ की ममता। अद्भुत रखती तन्मयता।। अर्पित हर-पल रहती है। बच्चों का दुख हरती है।। चलना वह सिखलाती है। सतपथ वह बतलाती है।। सहकर सारी बाधाएँ। सुख देती…

ऋतुराज के आगमन पर

ऋतुराज के आगमन पर    निकल उठीं हैं दिवा-रश्मियां  नव प्रभात, नव यौवन मन छाया है,  स्वागत के लिए कूक रही है कोकिला  क्रोड से निकल, विहगों ने स्वागत गीत…

प्रेम – एस.के.पूनम

  ऊँ कृष्णाय नमः विधाता छंद विषय:-प्रेम – एस.के.पूनम करें हम प्रेम जीवन में, सुखद परिणाम हम पायें। मिटा कर क्लेश लोगों का, भँवर को पार कर जायें। गहन हैं…

कहे ऋतुराज अपनों से-एस.के.पूनम

प्रभंजन आज चंचल है, विदाई सर्द की करते। अभी तो शुष्क धीरे से, तुषारापात को हरते। वसंती वात चलने से, प्रकृति के द्वार खुल जाते। भ्रमर जब गुनगुनाते हैं, हजारों…

मधुमास का श्रृंगार-मनु कुमारी

मधुमास ने जब धीरे से आँचल फैलाया, वसंत ने धरती को दुल्हन-सा सजाया। सौंदर्य झुका पत्तों की हरित पलकों में, लावण्य चमक उठा ,ओस की झिलमिल छलकों में। डाल-डाल पर…

घूँघट-मनु कुमारी

घूंघट में छुपा चाँद-सा मुख, नयनों में सपनों का बसेरा। लाज की कोमल चादर ओढ़े, मुस्कान बनी मन का सवेरा। धीमे-धीमे पग धरती पर, चूड़ियों ने गीत सुनाया है। पिया…