वंदन कर गुरुदेव का, करते सारे काम।
जिससे जीवन हो सरल, सहज सरस अभिराम।।
ज्ञान चक्षु जब खोलते, सहज भाव गुरुदेव।
ईश्वर का सानिध्य फिर, मिल जाता स्वयमेव।।
भवसागर तरना सहज, जिनके कर को थाम।
वंदन कर गुरुदेव का, करते सारे काम।।०१।।
हरते रहते दोष नित, प्रतिपल भर नवतेज।
हर विकार से मुक्ति दें, अंतस प्रेम सहेज।।
मिलता जब आशीष तो, मिल जाती सुर धाम।
वंदन कर गुरुदेव का, करते सारे काम।।०२।।
गुरुवर के सानिध्य से, विद्वत होता अज्ञ।
कीर्ति लाभ जग में गहे, पा जाता सर्वज्ञ।।
महामंत्र के रूप में, गुरु आज्ञा का नाम।
वंदन कर गुरुदेव का, करते सारे काम।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

