भरे हुए भंडार समय पर लूटो-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

भाग गया है शीत,निकल कर देखो। बाहर किरणें प्रीत,निकल कर देखो।। जो था कल तक ठोस,पिघलते देखो। बूॅंदें अटकीं ढीठ, चमकते देखो।। सोनू मोनू दौड़,लगा कर आओ। हवा फेफड़ा फेंक,स्वस्थ…

किनारा-रूचिका

किनारों पर खड़ा होकर गहराई का अंदाजा लगा नही सकते, बिना चोट के दर्द कितना ये कहाँ कभी बता सकते। कयास ,अंदाज ,अटकलें चाहे कितना भी लगा लें बिना चखे…

युवा-कुमारी रूपरानी 

“युवा हैं हमारे देश की शान  आओ मिलकर करें सलाम।। अपने जीवन को ना करो ध्रुमपान और मादक द्रव में बर्बाद, क्योंकि तुमसे हैं, मां-बाप का ही नहीं देश को…

*गुरु-शिष्य महिमा*

गुरु-शिष्य महिमा   गुरु चाणक्य का सानिध्य पाकर, चंद्रगुप्त मिशाल बना; नंद वंश का नाश कर, वह मगध सम्राट बना।   भद्रबाहु से शिक्षा पाकर, प्रियदर्शी अशोक बना; विश्वभर में…