Category: Shakshanik

Manu Raman Chetna

दहि तू एक्जाम रे ना -मनु कुमारीदहि तू एक्जाम रे ना -मनु कुमारी

0 Comments 2:56 pm

नुनू खुशी – खुशी से दहि तू एक्जाम रे, पाबिहैं बड़ा मुकाम रे ना। परीक्षा में डरै के नय कोनो[...]

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Nitu Rani

परीक्षा केअ एलै बहार-नीतू रानीपरीक्षा केअ एलै बहार-नीतू रानी

0 Comments 3:21 pm

परीक्षा केअ एलै बहार बहार मेरी सखिया बच्चा सेअ शोभै स्कूल हमार हमार मेरी सखिया परीक्षा —2। पहिले बच्चा अपन[...]

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Ram Kishore Pathak

मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठकमानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक

0 Comments 11:25 pm

मानवता जो जीवित मन में, उत्तम हर व्यवहार। भरा रहे मन नित खुशियों से, हर जीवों से प्यार।। सरल नहीं[...]

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परीक्षा-नैना कुमारी परीक्षा-नैना कुमारी 

0 Comments 11:21 pm

खेलकूद में नहीं बिताना  बच्चों अपना पूरा साल आएगा मार्च होगी परीक्षा  होगा तेरा बूरा हाल  गणित के प्रश्न पत्र[...]

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Ram Kishore Pathak

जीत का उत्सव-राम किशोर पाठकजीत का उत्सव-राम किशोर पाठक

0 Comments 8:33 pm

जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते। कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।। हार-जीत दोनों[...]

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Ram Kishore Pathak

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठककुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:22 pm

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी। निकले जब भी मुख से वाणी।। निज पर इतना अभिमान न कर। अपना इतना[...]

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Ram Kishore Pathak

महिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठकमहिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठक

0 Comments 2:32 pm

नारी के सम्मान की, आज लगी है होड़। पुरुष बिचारा कर रहा, घर-बाहर कर-जोड़।। घर-बाहर कर-जोड़, करे दिल को समझाए।[...]

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Jainendra

देवी अवतारी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’देवी अवतारी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:06 am

संसार की माता बन  संतानों को पालती हैं,  सृष्टि की कीमती रत्न, दुनिया में नारी है। घर हो या राजनीति [...]

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Manu Raman Chetna

करूणा की धारा – मनु कुमारीकरूणा की धारा – मनु कुमारी

0 Comments 2:24 pm

ममता की मूरत है वो, करूणा की निर्मल धारा है। मां ,बहन ,पत्नी ,सखी रूप में,रिश्तों की बगिया को संवारा[...]

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Ram Kishore Pathak

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप-राम किशोर पाठकवंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:20 pm

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप। उसके सारे रूप निराले, लगते बड़े अनूप।। धीरज धरती सा रखती हैं,[...]

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