मदिरा सवैया211-211-211-211=211-211-211-2 धूप कहाॅं दिखती अपना घर। काॅंप रही किरणें अब ऑंगन,देख प्रभा यह पस्त हुई।गर्म हवा अब भाग रही[...]
Category: ToB PadhyaPankaj
शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झाशरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा
शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर[...]
जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठकजीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक
जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते[...]
शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ[...]
वक्त पूछता है, गिरीन्द्र मोहन झावक्त पूछता है, गिरीन्द्र मोहन झा
वक्त पूछता है रात्रि में शयन से पूर्व वक्त पूछता है, आज तुमने क्या-क्या अर्थपूर्ण किया, सुबह होती है जब,[...]
बादल, आशीष अम्बरबादल, आशीष अम्बर
छोटी-छोटी बूँदें लाएँ, ये मतवाले बादल, श्वेत-स्लेटी, नीले-पीले, भूरे-काले बादल। कैसे-कैसे रूप बदलते, करते जादू-मंतर, हाथी जैसे कभी मचलते,[...]
मनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठकमनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठक
अंजन धारे सतत, कृष्ण कन्हाई नैन। देख लिया जो अगर, कैसे पाए चैन।। मूरत मनहर सुघर, मिले न कोई और।[...]
संशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठकसंशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठक
कृष्ण कन्हैया अगर, आते मिलने आज। होते विस्मित मगर, देख सभी के काज। माखन मिसरी सहज, उनको देता कौन। दुनिया[...]
भाई तुम उन्हीं को देना वोट, गिरीन्द्र मोहन झाभाई तुम उन्हीं को देना वोट, गिरीन्द्र मोहन झा
भाई तुम उन्हीं को देना वोट, भाइयों, बहनों तुम अवश्य करना वोट, उन्हीं को देना वोट, जो करे विकास की[...]
शरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठकशरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठक
देखो आया शुभद, आज कई संयोग। रजनी लगती नवल, चकवा का हठयोग।। पूनम सुंदर धवल, लेकर आयी रूप। आज पूर्णिमा[...]
