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दीप जलाएं – सविता सिंह
उम्मीदों के दीप बने हम ,
मिटे मूढ़ता का अंधियारा।
ज्ञान – ज्योति हम लेकर निकले,
हो जाए हर मन उजियारा।
हर मन मंदिर सा बन जाए ,
तम के सब बंधन कट जाएं।
घर का कोना – कोना दमके,
नव चेतन का दीप जलाएं।
अपने उर में झाँक सकें हम,
सही गलत को आँक सके हम।
तोड़ द्वेष की दीवारों को,
प्रेम उत्स बन-बन के बहे हम।
दीप जले न केवल घर में,
ऐसा हम त्यौहार मनाएं ।
ज्ञान,स्नेह,सद्भाव के दीपक
हर आंगन में चलो सजाएं।
सविता सिंह ,शिक्षिका
बक्सर बिहार

