देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार

रंगों से हुई आँख मिचोली, देखो आयी होली-आयी होली ।

बच्चों बूढ़ो की निकली टोली, देखो आयी होली-आयी होली ।।

प्यार भरा ये त्योहार, बना देता आपसी व्यवहार।

मिलती सबसे खुशियाँ हैं आपार, नही रह जाता मतभेद भरा विचार ।।

जब आती होलिका दहन की बारी, तब सभी मिल करते इसकी विशेष तैयारी।

जलते होलिका का है एक ही प्रतिक, हमेशा बुराई पर होती अच्छाई की जीत ।।

हर घरों में बनते उस दिन मिठे पकवान ।

खुब मजे से करते सारे व्यंजनों का नेवान ।।

फिर आती है होली खेलने की बारी ।

सभी रंग गुलाल लगाने की करते तैयारी ।।

सबसे प्यारा सबसे न्यारा है, ये त्योहार हमारा।

न रहता किसी से सिकवा, निभातें दिल से भाईचारा ।।

पहनकर नए कपड़े, लेकर ग़ुलाल जब सब मिलते।

स्नहे, आशीर्वाद पा कर सबसे, खुद को प्रिय हम समझतें ।।

रंगों से हुई आँख मिचोली, देखो आयी होली-आयी होली ।

 बच्चों बूढ़ो की निकली टोली, देखो आयी होली-आयी होली ।।

लेखक – श्री रवि कुमार जी

विद्यालय – कन्या उo मo विo, मसाढ़ ( उदवंतनगर, भोजपुर )

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