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दुखी माता-पिता – कार्तिक कुमार


Kartik Kumar

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दुखी माता-पिता – कार्तिक कुमार

 

जिस आँगन में माँ की लोरी, पिता का आशीर्वाद रहा,

जिस घर में बेटे के कारण, खुशियों का संसार रहा।

आज उसी घर के कोने में, दो आँखें बरस रही हैं,

जिनके दम पर बेटा जीता, वे भूखे ही तरस रही हैं!

 

माँ ने अपने हिस्से का सुख, बेटे के नाम किया,

पिता ने तपती धूप सहकर, उसका जीवन आसान किया।

खुद भूखे रहकर भी जिसने, बेटे को भोजन खिलाया,

आज उसी माँ-बाप के आगे, कैसा वक्त निकलकर आया?

 

बेटा शिक्षक! ज्ञान बाँटता! बच्चों को समझाता है,

क्या अपने घर का दर्द उसे, अब भी नहीं रुलाता है?

दुनिया को कर्तव्य सिखाने, रोज विद्यालय जाता है,

घर में बैठे माँ-बाप का कर्तव्य कौन निभाता है?

 

यह प्रश्न नहीं है केवल, यह मानवता की पुकार है,

माता-पिता की सेवा करना, जीवन का आधार है।

धन कमाना, पद पाना भी, जीवन की उपलब्धि सही,

मगर बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई सिद्धि नहीं!

 

उठो समाज! अब आँख खोलकर, अपने फर्ज पहचानो,

भूखे बैठे वृद्ध जनों को, भोजन और सम्मान दिलाओ।

माँ-बाप की आँखों में फिर से, खुशियों के दीप जलाओ,

उनके चरणों की सेवा करके, जीवन सफल बनाओ!

 

कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला, गोरौल, वैशाली

मोबाइल: 7004 318 121

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