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वक्त के इशारों पर मुड़ जाती हैं दिशाएँ भी,
मौन हो जाती हैं कभी सच्ची सदाएँ भी,
हुकूमत के साथ बदल जाती हैं वफाएँ भी।
जनता से जो करते थे,सुख-शांति के वादे,
दिखती नहीं उन्हें अब जरूरतमंदों की व्यथाएँ भी,
हुकूमत के साथ बदल जाती हैं वफाएँ भी।
करते थे जो पहले विरोध, भ्रष्टाचारियों के काम का,
कुर्सी पाकर मर गई हैं उनकी संवेदनाएँ भी,
हुकूमत के साथ बदल जाती हैं वफाएँ भी।
कहते थे जो विकास की गंगा बहाएँगे,
देख ली कसम से उनकी गिरगिट-सी अदाएँ भी,
हुकूमत के साथ बदल जाती हैं वफाएँ भी।
परोपकार का मन में भाव हो और कर्म निःस्वार्थ हो,
‘मनु’ कहे, मिल जाती हैं फिर सबकी दुआएँ भी,
हुकूमत के साथ बदल जाती हैं वफाएँ भी।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर,सुपौल

