२१२२-२१२२-२१२२
मैं अनवरत एक शिक्षार्थी रहूँगा।
कर्म में तल्लीन पुरुषार्थी रहूँगा।।
वक्त ही सबको सिखाता है यहाँ पर।
वक्त का मैं खास विधार्थी रहूँगा।।
ज्ञान के जो हैं धनी उनसे सदा ही।
मार्ग नूतन प्राप्ति अभ्यर्थी रहूँगा।।
प्रेम सब मुझसे करें यह चाहता हूँ।
नेह का तो मैं सदा स्वार्थी रहूँगा।।
हो सके मुझसे न आहत अन्य कोई।
कर्म का रख ध्यान परमार्थी रहूँगा।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८
विद्यार्थी रहूँगा- गीतिका
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