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किताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन दे – अफ़शां बेगम
किताबों के सफो में मुस्कुराते बालपन देखें।
चलो स्कूल चलकर आज बच्चों का चमन देखें।
सुबह की धूप सी चहकन, दुवाओं जैसी पाकीज़गी देखें।
हँसी चेहरों पे हम, बिखरा हुआ मासूम फ़न देखें।
घंटी की सदा पर दौड़ते नन्हें से वो कदम देखें।
वो झूठे रूठने- मनाने का हम बचपन देखें।
कभी काग़ज़ की कश्ती है, कभी सपनों के पतंगें देखें।
इन्ही डालियों में उड़ता हुआ हम एक गगन देखें।
अध्यापकों की सीख और बच्चों की नटखट अदा देखें।
मोहब्बत और तहज़ीब का अफ़्शा ख़ूबसूरत यह संगम देखें।
अफ़शां बेगम
नियोजित शिक्षिका
उर्दू प्राइमरी स्कूल करवंदिया
चाँद- कैमूर, बिहार

