मैं अपनी पहचान बना लूं
गुमनाम होने से पहले,
जी करता है , गांव के मैले आंचल में छुप जाऊं दूर शहर में खोने से पहले,
या वापस उस गुरु के चरणों में गिर जाऊं पानी जैसे बह जाने से पहले,
मैं अपनी पहचान बना लूं ,गुमनाम होने से पहले।
ऊंगली थाम लूँ उस पिता की वापस ,भीड़ में खोने से पहले,
लौट जाऊं उस बचपन में गंभीर कल्पना में डूबने से पहले,
चंचल मन को मुक्त कर दूं ,चेतना सोने से पहले।
मैं अपनी पहचान बना लूं ,गुमनाम होने से पहले।
सखियों के संग अटखेली कर लूं , ज़िन्दगी रूठने से पहले,
या रवानी मौज में भर दूं ,अपनी खुशियां लूटने से पहले,
ऊंचे पेड़ों की शाखाओं को छू लूं,ये धरा बंजर होने से पहले,
या तितली बन मै उड़ लूं जी भर,बाग़वा उजड़ जाने से पहले,
मैं अपनी पहचान बना लूं ,गुमनाम होने से पहले।
उस दरिया में गोते लगा लूं ,समंदर सूखने से पहले ,
सूरज की किरणें , समेट लूं अंधेरा होने से पहले,
मैं अपनी पहचान बना लूं , गुमनाम होने से पहले।
पूनम कुमारी

