Day: October 6, 2026

Dharmendra Kumar Thakur

क्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:26 pm

क्रोध की सीमा न होती है, जब यह उमड़ आती है, इसकी ज्वाला धधक-धधक कर, विवेक मानव खा जाती है।[...]

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Umesh kumar sinha

हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘हम प्रकृति के पेड़ बेचारे – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘

0 Comments 11:15 pm

 प्रकृति के पेड़-पौधे हम बेचारे, हम मानव के बहुत काम आए, आएँगे। पर मुझे यह अरमान नहीं कि मानव से[...]

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Punam Kumari

मैं अपनी पहचान बना लूं- पूनम कुमारीमैं अपनी पहचान बना लूं- पूनम कुमारी

0 Comments 11:03 pm

मैं अपनी पहचान बना लूं गुमनाम होने से पहले, जी करता है , गांव के मैले आंचल में छुप जाऊं[...]

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Punam Kumari

प्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारीप्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारी

0 Comments 7:10 pm

जब धरती की साँसें घुटती हैं, जब नदियाँ रोती हैं, जब जंगल की हरियाली धीरे-धीरे खोती है, तब कौन बनेगा[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

देश का भविष्य: नन्हें मुन्ने-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदेश का भविष्य: नन्हें मुन्ने-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 6:58 pm

ये बात है उन नन्हें मन्नों की, मासूम सी भोली आँखों की। खेल ही जिनकी दुनिया है, ना फिक्र इन्हें[...]

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आत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्माआत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्मा

0 Comments 6:45 pm

अपने धुन में ही लगे हैं सब किसी को किसी की सोच नहीं समझ सको समझो ,ये जिंदगी बोझ नहीं[...]

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