वीरों की गाथाओं में है, एक पुराना नाम। वीरांगना अहिल्याबाई, को हम करें प्रणाम।। महाराष्ट्र साम्राज्य मराठा, चौंड़ी नामक गाँव।[...]
कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठककृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
कृपा करो प्रदान माँ। मिले नया विहान माँ।। निदान भूल का करो। विकार शूल को हरो।। विचार शुद्धता भरो। प्रगाढ़[...]
अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठकअंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान[...]
गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झागीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
श्रीकृष्ण कहते, तुझमें शक्ति है, तू परंतप, महाबाहो, महावीर है, तू पार्थ, ईश्वर का पवित्र अंश, गुडाकेश, साहसी, परम धीर[...]
कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठककैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक
कैसे आए शांति- सरसी छंद गीत गद्दारों की फौज खड़ी हैं, जो फैलाती भ्रांति। विकट समस्या आज जगत् की, आए[...]
बीत गया फागुन माह- रामकिशोर पाठकबीत गया फागुन माह- रामकिशोर पाठक
चैत्र- राधिका छंद गीत बीत गया फागुन माह, चैत है आया। महुआ का मादक गंध, प्रीत भर लाया।। नूतन आता[...]
यही है सार जीवन का -एस. के. पूनमयही है सार जीवन का -एस. के. पूनम
विधा:-विधाता छंद। (यही है सार जीवन का) यहाँ सीखा, रहो मिलकर, न जीओ तुम, निराशा में। पढ़ी सरगम, उमंगों की,[...]
जीत का उत्सव-राम किशोर पाठकजीत का उत्सव-राम किशोर पाठक
जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते। कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।। हार-जीत दोनों[...]
नींद से अब जागिए-राम किशोर पाठकनींद से अब जागिए-राम किशोर पाठक
नींद से जग जाइए। गीत प्रभु का गाइए।। भूल कड़वी बात को। प्रेम से मुस्काइए।। दोष जिसका भी रहा। रोष[...]
कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठककुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक
कुछ तो सोच समझ ले प्राणी। निकले जब भी मुख से वाणी।। निज पर इतना अभिमान न कर। अपना इतना[...]
