Ram Kishore Pathak

सज्जन कैसे जी सके -राम किशोर पाठकसज्जन कैसे जी सके -राम किशोर पाठक

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सज्जन कैसे जी सके- दोहा छंद गीत भ्रष्टाचारी बोलते, करके हर-पल शोर। सज्जन कैसे जी सके, बने नहीं जो चोर।।[...]

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Ram Kishore Pathak

गृह प्रवेश -रामकिशोर पाठकगृह प्रवेश -रामकिशोर पाठक

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गृह प्रवेश- विजया छंद शुभ वरदाई मंगल गणेश जी। करने आए शुभ गृह प्रवेश जी।। सारे परिजन का शुभ विचार[...]

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राधे-राधे -राम किशोर पाठकराधे-राधे -राम किशोर पाठक

0 Comments 5:26 pm

आओ प्यारे राधे-राधे गाने आओ। बंशी वाले गोपाला को पाने आओ।। क्यों खोये हो यों ही बोलो अंगारा में। आओ[...]

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