खुशियाँ न देना तू इतनी प्रभु कि दुखियों के गम पर हँसने लगूँ ऊँचाई न देना तू इतना प्रभु कि[...]
पुस्तकें – सुरेश कुमार गौरवपुस्तकें – सुरेश कुमार गौरव
पुस्तक ज्योति समान है, तम को करती दूर। शब्द-शब्द में ज्ञान है, रस को लें भरपूर।। गुरुवाणी का गूंजना, देता[...]
दोहा विधान – राम किशोर पाठकदोहा विधान – राम किशोर पाठक
आओं हम सीखा रहे, दोहा लिखना खास। सरल तरीका है यही, करना है अभ्यास।।०१।। जान रहा हूँ मैं यहाँ, ज्ञान[...]
माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी
भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]
पुस्तकें – रत्ना प्रियापुस्तकें – रत्ना प्रिया
जीवन की आधार पुस्तकें, ज्ञान की भंडार पुस्तकें, “तमसो मा ज्योतिर्गमय” की, भरती है संस्कार पुस्तकें । जग को राह[...]
अब हमें भूगोल बदलना चाहिए – निधि चौधरीअब हमें भूगोल बदलना चाहिए – निधि चौधरी
अब दुश्मन को मिलकर दलना चाहिए लाहौर कराची नही पूरा पाक दहलना चाहिए। गुस्ताखी कर दी,तुमने हमें छेड़ कर, अब[...]
कुँवर सिंह – राम किशोर पाठककुँवर सिंह – राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी मृगराज सी हुँकार, चमकती तलवार, अंग्रेजों को ललकार, किए जो कमाल थे। उम्र अस्सी किए पार, यौवन सी[...]
वीर कुँवर की हुंकार – एस. के. पूनमवीर कुँवर की हुंकार – एस. के. पूनम
विधा: मनहरण छंद मगध की भूमि पर, कुँवर सेनानी वीर, हुंकार शार्दूल सम, दुश्मनों के काल थे। न थी उम्र[...]
वीर कुँवर सिंह – रत्ना प्रियावीर कुँवर सिंह – रत्ना प्रिया
वीर कुँवर, तुम मगध भूमि के, भारती के लाल थे, अंग्रेजों को मार भगाने, संहारक व काल थे। अस्सी वर्ष[...]
विधा: दोहा – देवकांत मिश्र ‘दिव्यविधा: दोहा – देवकांत मिश्र ‘दिव्य
विधा: दोहा पृथ्वी दिवस मनाइए, लेकर नव विश्वास। जन-जन को जागृत करें, पेड़ लगाएँ पास।। हरित दिखे धरती सदा, ऐसा[...]
