याद उन्हीं की आती है -रामपाल प्रसाद सिंह

याद उन्हीं की आती है। निशि-वासर को चैन नहीं है,पीड़ा वाण चलाती है। छोड़ चले जाते हैं जग को,याद उन्हीं की आती है।। मेरी पीड़ा हरनेवाली,पीड़ा देकर कहाॅं चली। सिंधु…

रिश्ता रखें सच्चा -जैनेन्द्र प्रसाद

प्रभाती पुष्प रिश्ता रखें सच्चा संगी-साथी मित्र सच्चे, मिलते कहांँ हैं अच्छे, संबंध जो बन जाए, रिश्ता रखें सच्चा है। किसी से जो नाता जोड़ें उसको निभाना सीखें, वरना तो…

आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

  खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने नहीं देती। मात रोने नहीं देती।। दौड़ती वो सदा आती।…

पंछी -रामपाल प्रसाद सिंह

दो पंछी क्यों विवश हुए हैं,बाहर जाने को। अपने हुए पराए मतलब,है समझाने को।। जीवन का हर पल सुखमय जब,तूने पाए थे। रहते संग परिवार में सबको,सुख पहुॅंचाए थे।। अब…

स्कूल चलें हम- बाल कविता

स्कूल चलें हम- बाल कविता शाला में सिखलाया जाता। खेल-कूद करवाया जाता।। खाने को भी मिलता सबको। प्यार सदा ही मिलता सबको।। फिर मुझको क्या होगा गम। क्योंकर होगी आँखें…

संपूर्ण ज्ञान अश्मजा प्रियदर्शिनी

संपूर्ण ज्ञान प्रदाता पुस्तक है सरस्वती समान। यह सर्वश्रेष्ठ पर प्रदर्शक विज्ञता जीवन में प्रधान। शास्वत जग ब्रह्मांड का विवरण देता है, कालचक्र की समस्त घटना का मान्य करता बखान।…