खेतों में हरियाली शोभें सरसों-अलसी बलखाती है। ऋतुराज के स्वागत में कोयल गीत खुशी से गाती है। नव पल्लव पा मधुबन हंँसता कलियांँ खिलती हैं धीरे, हरे दूब पर बिछें…
फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
खिली जो कलियाँ ले नव रंग। फाग में महका है हर अंग।। देख कर फूलों का शृंगार। भ्रमर ने छेड़ा कोई तार।। प्रीत है गाता उसका गान। सुनी तो कलियाँ…
तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
सारी नाउम्मीदी, उलझनों, चिंताओं को किनारे रखकर, एक बार उठो तो सही! पता है कि रास्ते में आती हैं मुश्किलें हजार कोई बात नहीं; घबराना, रुकना या…
देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
रंगों से हुई आँख मिचोली, देखो आयी होली-आयी होली । बच्चों बूढ़ो की निकली टोली, देखो आयी होली-आयी होली ।। प्यार भरा ये त्योहार, बना देता आपसी व्यवहार। मिलती सबसे…
फाग-राम किशोर पाठक
हुआ है धूमिल सभी उमंग। फाग में कैसे खेलें रंग।। लगे हैं रोटी में श्रीमान। सदा हैं वे भी तो हलकान।। याद उनको भी आती रोज। रहे नित अवसर को…
फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
बजाते हैं सब देखो ढोल। फाग क्या होती अम्मा बोल।। सभी जो करते हैं हुड़दंग। तभी तो जो जाता हूँ तंग।। सभी के ऐसे होते ढंग। देखकर आता हमें उमंग।।…
बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
बसंत की बहार है, वर्षा की फुहार है। रंगों का त्योहार है, आया खुशियों का बौछार है। सूरज की किरणे सारी, कोयल की कूक प्यारी। भँवरे की राग न्यारी, गीतो…
गर्मी आई -नीतू रानी
विषय -गर्मी आई। शीर्षक -झटपट भागा ठंडा भाई। झटपट भागा ठंडा भाई, लेके कंबल और रजाई। स्वेटर पहनकर जैसे- तैसे भागा , जैसे उड़ता काला कागा। छोड़ गया वह पतला…
सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक
सामाजिक न्याय- दोहा छंद गीत न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान। पाना सब हैं चाहते, मुश्किल होना मान।। समता इसका मूल है, बड़ा कठिन सा कार्य। स्वार्थ रहित…
पैगाम – राम किशोर पाठक
दीवानों का हाल सुनाने, संग लिए अपने पैगाम। कुसुमाकर है दौड़ा आया, बैठे हम अपना चित थाम। रंग-गुलाल हवा है मिलकर, लगा रहा सबको है रंग। मंद-मंद वह छूकर सबको,…