पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik,पर्यावरण,प्रकृति प्रकृति की अनमोल विरासत — उमेश कुमार सिन्हा ‘ ‘निर्देशक ‘

प्रकृति की अनमोल विरासत — उमेश कुमार सिन्हा ‘ ‘निर्देशक ‘



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नीले नभ की छत्रछाया में, धरा अनोखी रानी है,

पर्वत इसके मुकुट सुहाने, नदियों की कल्याणी है।

रंग-बिरंगे फूलों से सजी, वादियों की मुस्कान है,

प्रकृति की अनुपम कारीगरी, धरती की पहचान है।

कहीं सरसों हँसती पीली, कहीं गुलाबों की लाली,

कहीं लताओं की बाहों में, कलियों ने आँखें खोलीं।

कहीं झरनों की रुनझुन गूँजे, कहीं पवन की तान,

कण-कण में सौंदर्य बिखेरे, धरती माँ महान।

वृक्ष खड़े हैं प्रहरी बनकर, ऋतुओं के बदलाव में,

पक्षी गीत सुनाते रहते, भोर-साँझ के भाव में।

नन्ही दूब की मुस्कान में, धीरज का संदेश,

वन के हरित विस्तार में, जीवन का परिवेश।

माटी की गोदी में पलकर, बीज कहानी लिखता है,

बूँद-बूँद जल पाकर पौधा, सपनों जैसा दिखता है।

कल जो नन्हा अंकुर था, कल छाया बन जाएगा,

अपनी बाँहें फैलाकर, थके पथिक को सहलाएगा।

फूल सिखाते प्रेम बाँटना, फल सिखलाते दान,

नदियाँ चलना सिखलाती हैं, पर्वत दृढ़ता का ज्ञान।

सूरज देता कर्म-प्रेरणा, चंदा शीतलता का सार,

प्रकृति स्वयं ही खोल रही है, जीवन का व्यवहार।

हिमगिरि के ऊँचे शिखरों पर, औषधियों का भंडार,

संजीवनी-सी वनस्पतियों से, महक रहा संसार।

जटामांसी, कुटकी, अतीस, प्रकृति के अनमोल उपहार,

असंख्य वनस्पतियाँ सँजोए, हिमगिरि का पावन संसार।

देवदार की छटा निराली, भोजपत्र की शान,

जड़ी-बूटियों की संपदा से, समृद्ध हिमालय महान।

आयुर्वेद की ज्ञान-परंपरा, इनसे पाती आधार,

प्रकृति की रक्षा में ही छिपा है, मानव का कल्याण अपार।

पर मानव की स्वार्थ-लालसा, जब मर्यादा लाँघ रही,

वन की हरियाली सिमट रही, धरती पीड़ा झेल रही।

सूख रहे जल के स्रोत, हवा में घुलता विषाद,

प्रकृति को यदि भूल गए तो, कैसे बचेगा संसार?

आओ, फिर से प्रण लें मिलकर, हरियाली अपनाएँगे,

सूखी धरती के अधरों पर, जल की बूँद सजाएँगे।

एक-एक पौधा रोपेंगे, उसका जीवन सँवारेंगे,

आने वाली पीढ़ी को हम, हरे-भरे वन सौंपेंगे।

धरती का वैभव धन-संपदा से, कभी नहीं आँका जाए,

इसकी मिट्टी, जल और वन से, जीवन का दीप जल पाए।

प्रकृति सुरक्षित, तभी सुरक्षित, मानव का संसार,

हरियाली ही धरती माँ का, सबसे सुंदर श्रृंगार।

धरती केवल रहने का घर नहीं, जीवन का आधार है,

इसकी रक्षा करना ही, मानव का सच्चा संस्कार है।

उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय 

गोस्वामी तुलसीदास पथ लालापुल, रघुनाथपुर 

अंचल- ब्रह्मपुर (श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)

जिला – बक्सर

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