पद्यपंकज Uncategorized गर्मी -रामकिशोर पाठक

गर्मी -रामकिशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

लेख सुनें तैयार

गर्मी- हास्य-व्यंग्य कुंडलियां

गर्मी भीषण पड़ रही, सूरज हुए प्रचंड।
व्याकुल सारे लोग हो, खोज रहे हैं ठंड।।
खोज रहे हैं ठंड, छाछ लस्सी हैं पीते।
छुपकर रहते गेह, कैद में जैसे जीते।।
पर कैसा संयोग, बात में है बेशर्मी।
गर्म माँगते चाय, पड़े कितनी भी गर्मी।।०१।।

गर्मी आते ही सभी, हो जाते बेहाल।
तन पर कपड़ा भी नहीं, जैसे हो कंगाल।।
जैसे हो कंगाल, आज समता हो आई।
पहनावे का धौंस, ठंड में खूब दिखाई।।
घूम रहे अधनंग, धौंस में आई नर्मी।
सब करते हैं हाय!, बहुत पड़ती है गर्मी।।०२।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

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