आज की नारी
अपने घावों से खुद ही उबरती,
संघर्ष की जमीन पर
एक नई पटकथा लिखती
है वह आज की नारी
जो नित नए आयाम को गढ़ती।
दोहरी जिम्मेदारी भी निभाती
स्वयं के अस्तित्व को बचाती
अपनी इच्छाओं को जीती वह
है वह आज की नारी
जो अपने दम पर सपनों को जीती जाती।
प्रेम से रिश्तों को जीती जाती,
त्याग से है उसको सम्भालती,
सर्मपण रखती है वह हर रिश्ते में
है वह आज की नारी
बुरी नजर से भी स्वयं को बचाती।
कठिनाइयों से वह पार पा जाती,
मुश्किलों में भी राह वह बनाती,
बन प्रेरणा वह जीती जाती
है वह आज की नारी
हर असम्भव को स्वयं वह बनाती।
रूचिका
प्रधान शिक्षिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार
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