संसार- दोहे – राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

संसार- दोहे

जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार।
अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।।

दुख को जो है झेलता, कहे दुखी संसार।
खुशियाँ जिसको हैं मिली, वह करता जयकार।।०२।।

मन को निर्मल कीजिए, कुसुमित हो संसार।
कार्य सभी होता सफल, मिलती कीर्ति अपार।।०३।।

भक्ति-भाव के साथ में, निर्मल रख मन सार।
प्रेम सभी से कीजिए, पावन हो संसार।।०४।।

कोई सिमटा है यहाँ, अपने ही परिवार।
समझ रहा है वह सदा, इतना ही संसार।।०५।।

कोई अपना त्याग कर, देख रहा संसार।
उपकारी बनकर सदा, रहता है तैयार।।०६।।

दोहाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना।
संपर्क – 9835232978

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