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स्कंदमाता
नवदुर्गा का पंचम स्वरूप,
कहलाती हैं स्कन्दमाता ।
हर कामना को पूरा करती,
सुख-समृद्धि औ”मोक्ष दाता।।
कमलासन सुशोभित अम्बे ,
चार भुजाधारी सौम्य स्वरूप ।
पीत वसन और कुंकुम-चंदन,
ले खड़े नर -नार संग भूप।।
तू सूर्यमंडल अधिष्ठात्री देवी ,
जगमग है माँ तेरा दरबार ।
एकाग्रचित्त, पवित्र मन से ,
दूर हो हर क्लेश – विकार ।।
हो शक्तिस्वरूपा तू जगदंबे ,
कर दो बस एक उपकार ।
फँसी नैया मँझधार में मेरी ,
कर भी दो भवसागर पार।।
नवचेतना संचार हो करती,
अंतर्मन का तू करे जागरण ।
स्वीकार करो माँ भक्ति हमारी ,
करती हूं तुझे बारम्बार नमन ।।

