शिक्षक – गिरीन्द्र मोहन झा शिक्षक ही करते हैं सभ्य समाज निर्माण, विद्यार्थी ही है आदर्श शिक्षक की पहचान, शिक्षक[...]
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श्रीकृष्ण – गिरीन्द्र मोहन झाश्रीकृष्ण – गिरीन्द्र मोहन झा
श्रीकृष्ण – गिरीन्द्र मोहन झा बचपन से तेरी लीला हुई शुरु, सदा रहा कर्तव्य का ध्यान, सत्य-धर्म पर चलकर तूने,[...]
पेड़- गिरीन्द्र मोहन झापेड़- गिरीन्द्र मोहन झा
पेड़ बीज को अंकुरित होने में भी लगता है संघर्ष, पौधे धीरे-धीरे बढ़कर हो जाते हैं पेड़, यह पतझड़-वसंत-ग्रीष्म-वृष्टि-शीत, सबको[...]
जीवन-दर्शन – गिरीन्द्र मोहन झाजीवन-दर्शन – गिरीन्द्र मोहन झा
तुम अपने जीवन के सुदीर्घ पथों को देख, मात्र निज जीवन-यात्रा पर फोकस करना। तेरा जीवन सहज, पवित्र, अर्थपूर्ण, परोपकारमय[...]
