पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik उलझन सुलझाएं -धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

उलझन सुलझाएं -धर्मेंद्र कुमार ठाकुर


Dharmendra Kumar Thakur

लेख सुनें तैयार

गणित की दो धाराएँ: ल.स. और म.स.

गणित नगर के दो हैं भाई,

दोनों ने अद्भुत महिमा पाई।

एक ढूँढता सबसे छोटा गुणाकार,

दूजा ढूँढता सबसे बड़ा विभाजन का आधार।

लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) कहता, मैं हूँ वह छोटी सी काया,

जिसने दी गई संख्याओं को खुद में समाया।

सबका पहाड़ा (गुणज) मुझ तक चलकर आता है,

मैं छोटा होकर भी उनसे पूरा कट जाता हूँ।

गुणनखंड की अधिकतम घातों को जब हम मिलाते हैं,

तब जाकर हम ल.स. का मान पाते हैं।

महत्तम समापवर्तक (HCF) बोला, मेरी सुनो कहानी,

मैं हूँ सबसे बड़ा विभाजक, ताकत अपनी जानी।

दी गई संख्याओं को मैं खुद जाकर काटूँगा,

बिना बचे शेषफल, सबको बराबर बाँटूंगा।

जो गुणनखंड सबमें साझ (उभयनिष्ठ) दिखाई देता है,

बस उसकी न्यूनतम घातों को म.स. चुन लेता है।

अद्भुत इनका मेल है, अनोखा इनका ढंग,

संख्याओं का खेल चलता हमेशा इनके संग।

दोनों को तुम गुणा करो, तो बात समझ में आएगी,

संख्याओं के खुद के गुणनफल के बराबर वह हो जाएगी।

एक काटता, एक कट जाता, गणित का यह नियम सिखाता,

ल.स. और म.स. का यह रिश्ता, हर उलझन को सुलझाता।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला 

रानीगंज अररिया

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply