पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik,प्रकृति वृक्ष-बेबी अर्चना

वृक्ष-बेबी अर्चना



वसुंधरा का ये करते श्रृंगार
ईश्वर प्रदत्त अनमोल उपहार
प्राणवायु हम सब को देते
उनसे ही है जीवन आधार

शीतल छाया संग मंद पवन
फल फूलों के भंडार हैं वन
परिंदे भी आसरा हैं पाते
वहीं बसाए सुखमय संसार

बादल को वो पास बुलाए
सरसों फूले,मन मुस्काए
वन आच्छादित गिरिवर होते
हैं वसुधा के वो कंठहार

तप्त धरा को नम वो करते
अंगार, ठिठुरन हरदम सहते
पर्यावरण को कर संतुलित
इनके हैं अनगिन उपकार

धरती की तो शान हैं वृक्ष
ईश्वर का वरदान है वृक्ष
निस्वार्थ भाव परहित सेवा
मनुज को ये अमूल्य उपहार

काट रहे जो तार तरुवर
दिख रहा प्रकृति का कहर
आओ मिलकर वृक्ष लगायें
करो ना इनका अब संहार

विटप तो हैं जीवन के रक्षक
मानव क्यों फिर बना है भक्षक
मानव अपशिष्ट को पीते हरदम
आओ मिलकर करें विचार …..

बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंड कुर्साकांटा जिला अररिया

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